Breaking News
Home / Tag Archives: think writer think (page 14)

Tag Archives: think writer think

जागों लाइनों में खड़े हो जाओ

india-flag-revolution

कवि की कविता जो लोगों को एहसास कराती हैं जिन्दगी से जुड़े फलसफों के बारे में… बचो देश के गद्दारों से, “भारत माता” का नारा लगाएगा नासमझी थी, समझाकर, देशवासियों को लूट जाएगा जागों लाइनों में खड़े हो जाओ, देश का काला धन खत्म हो जाएगा। तुम्हारे कंधों पे बंदूक …

Read More »

आम से खास बनता सोच का दायरा…

freedom-of-speech

हमारा संविधान जिसे हम हमारा कह रहे हैं, क्या वो हमारा हैं? दरअसल आज के वक्त में हमारा रहा ही नहीं हैं। मुझे 2014 के पहले का दौर याद आ रहा हैं, जहां पर सरकार की आलोचना करने पर हमले नहीं हुआ करते थे। वो दौर था जहां लोग खुलकर …

Read More »

संदेश कविता की पहल में…

pen

कवि की कविता जैसे किसी का पहला प्यार, दिल से जुड़े जज्ब़ात या फिर वो बात जो दिल की तह में बस गई हो। कविता वो एहसास हैं, जो मन में चल रही विडम्बनाओं को शब्दों के जरिए परोसा जाता हैं। किसी कवि की पहली कविता वे शुरूआती अक्षर होते …

Read More »

मुल्क की दुर्भाग्यवश आवाम, जो हो रही हैं कुर्बान…

parliament-building-india

500-1000 के नोटबंदी की गूंज आपको संसद से लेकर सड़क तक हर जगह सुनने को मिलेगी। 8 नवम्बर की मध्य-रात्रि प्रधानमंत्री का देश के नाम संबोधन पश्चात 500-1000 के पुराने नोट रद्दी हो गए। जिन्होंने भी वरसो-वरस से भ्रष्टाचार करके लाखों-करोड़ो रुपए बचा के रखे थे, अब महज वो कागज …

Read More »

जालिम को जो न रोके वो शामिल हैं जुल्म में…

protest-clipart

पीएम मोदी ने कहा लोगों को तकलीफें तो होगी सह लो…. क्या ऐसी ही तकलीफों की बातें की गई थी ? देश के तमाम हिस्सों से खबरें आ रही हैं कि कही इलाज की वजह से किसी बच्चे की मौत हुई, तो कहीं औरतों के साथ मारपीट की गई, तो …

Read More »

आखिर देश पर क्यों लग रहा है सवालिया निशान?

ndtv-india-final

आखिर क्यों उठाना पड़ा रवीश कुमार को यह कदम कि सहारा मूक अभिनय के सिवा कुछ और न मिला। इसका जवाब कौन देगा, खुद रवीश कुमार, एनडीटीवी या फिर हमारी शासन व्यवस्था, आखिर कौन? यह बहुत मार्मिक सवाल हैं लेकिन इसके बारे में सोचना तो पड़ेगा, कि आखिरकार क्यों किसी …

Read More »

अंग्रेजी स्कूलों से गुजरता हुआ सरकारी भविष्य?

child

आज स्थिति ये हो गई है कि सरकारी नौकरी की चाहत रखने वाला या सरकारी नौकरी में सेवारत व्यक्ति अपने बच्चों को निजी इंग्लिश मीडियम स्कूलों में पढ़ाता है। आर्थिक रूप से संपन्न सरकारी सेवारत स्थाई शिक्षकों के बच्चे तो निश्चित तौर निजी स्कूलों में ही पढ़ते है।  दूसरी सरकारी …

Read More »

क्या आंखें खुल जाएगी ‘Be The Bitch’ के बाद ?

final-depression

हमारे इस समाज का भी कोई जवाब नहीं ये कब किस लड़की को क्या बना दें कुछ नहीं कहा जा सकता। कुछ नहीं कहा जा सकता इस बारे में कब ये किस लड़की को देवी बना दें और कब राक्षसी, क्योंकि इस समाज के कुछ अपने मापदंड हैं, जरुरी नहीं …

Read More »

क्या मौत कमाने में लगाया था वक्त मैंने?

suicide

प्यार, लिव-इन, धोखा, ब्रेक अप, मूव ऑन, शादी ये कुछ ऐसे शब्द है, जो आजकल के युवाओं की जुबां पर चढ़े हुए हैं। बात लव बर्ड्स की, जिनमें से कुछ को अपनी मंजिल मिल जाती हैं और कुछ बीच सफर में एक दूसरे का साथ छोड़ देते हैं। इस बीच …

Read More »

राजनैतिक गलियारों से उठकर, क्या प्रथाए बदल पाएंगे राजनेता…

politics

28-29 सितम्बर को हुए सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से देश की सियासत गर्माती जा रही हैं। एक ओर पीएम नरेंद्र मोदी को इस ऑपरेशन के लिए बधाईयां मिल रही हैं तो दूसरी तरफ उनसे ऑपरेशन से जुड़े सबूत मांगे जा रहे हैं। देश की सुऱक्षा के मामले को इस तरह …

Read More »