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Tag Archives: think writer think

आखिर देश पर क्यों लग रहा है सवालिया निशान?

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आखिर क्यों उठाना पड़ा रवीश कुमार को यह कदम कि सहारा मूक अभिनय के सिवा कुछ और न मिला। इसका जवाब कौन देगा, खुद रवीश कुमार, एनडीटीवी या फिर हमारी शासन व्यवस्था, आखिर कौन? यह बहुत मार्मिक सवाल हैं लेकिन इसके बारे में सोचना तो पड़ेगा, कि आखिरकार क्यों किसी …

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अंग्रेजी स्कूलों से गुजरता हुआ सरकारी भविष्य?

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आज स्थिति ये हो गई है कि सरकारी नौकरी की चाहत रखने वाला या सरकारी नौकरी में सेवारत व्यक्ति अपने बच्चों को निजी इंग्लिश मीडियम स्कूलों में पढ़ाता है। आर्थिक रूप से संपन्न सरकारी सेवारत स्थाई शिक्षकों के बच्चे तो निश्चित तौर निजी स्कूलों में ही पढ़ते है।  दूसरी सरकारी …

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क्या आंखें खुल जाएगी ‘Be The Bitch’ के बाद ?

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हमारे इस समाज का भी कोई जवाब नहीं ये कब किस लड़की को क्या बना दें कुछ नहीं कहा जा सकता। कुछ नहीं कहा जा सकता इस बारे में कब ये किस लड़की को देवी बना दें और कब राक्षसी, क्योंकि इस समाज के कुछ अपने मापदंड हैं, जरुरी नहीं …

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क्या मौत कमाने में लगाया था वक्त मैंने?

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प्यार, लिव-इन, धोखा, ब्रेक अप, मूव ऑन, शादी ये कुछ ऐसे शब्द है, जो आजकल के युवाओं की जुबां पर चढ़े हुए हैं। बात लव बर्ड्स की, जिनमें से कुछ को अपनी मंजिल मिल जाती हैं और कुछ बीच सफर में एक दूसरे का साथ छोड़ देते हैं। इस बीच …

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राजनैतिक गलियारों से उठकर, क्या प्रथाए बदल पाएंगे राजनेता…

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28-29 सितम्बर को हुए सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से देश की सियासत गर्माती जा रही हैं। एक ओर पीएम नरेंद्र मोदी को इस ऑपरेशन के लिए बधाईयां मिल रही हैं तो दूसरी तरफ उनसे ऑपरेशन से जुड़े सबूत मांगे जा रहे हैं। देश की सुऱक्षा के मामले को इस तरह …

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नजरें झुकाकर नहीं, उठाकर जवाब दो…

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आज के इस समाज में लड़की होना अपने आप में बड़ी बात है। इतनी बड़ी कि हम शायद ही उस एहसास को शब्दों में बयां न कर पाए। जिससे लड़कियां रोजमर्रा की जिंदगी में दो चार होती, कहां उन्हें ऐसे सिरफिरे नहीं टकराते होंगे जो एक टक उन्हें घूरते रहे। …

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कलयुगी बेटे ने ढाया माँ पर जुल्म…

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बचपन जिस बेटे को अपने तमाम गम और तकलीफ को ताख पर रखकर जिस मां ने अपने कलेजे से लगाकर ज़िंदगी दी होगी क्यो वो बेटा बड़े होकर अपनी उसी मां को गला घोंटकर मारने की कोशिश कर सकता है। शायद आप भी मेरी तरह से इन लाइनों को बेसिर …

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आपका एक Compliment बना सकता हैं किसी का दिन…

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आप जब सुबह के समय घर से निकलते हैं तो न जाने कितने ही लोगों से आपका सामना होता है, जिनमें से कुछ पर आपकी निगाहें टिकी रह जाती है। तो कुछ आपकी नजरों से ओझल हो जाते हैं। वहीं कुछ लोगों की कई चीजें आपको सोचने पर मजबूर कर …

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सुरक्षित हाथों में है भारतीय क्रिकेट का भविष्य

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हमारे मुल्क़ में शायद क्रिकेट को इसी लिये सिर आंखों पर रखा जाता है क्योंकि इस खेल ने देश को तमाम बार अपना सीना गर्व से चौड़ा करने का मौका दिया है। इसी क्रम में एक बार फिर से भारत ने मील का पत्थर स्थापित करते हुए 500 टेस्ट खेलने …

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युवा भारत का गुलाम बचपन…

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खुद का बचपन तो बच्चों की तरह गुजार दिया, इन बच्चो पर बड़ो का बोझ लाद दिया… एक जिन्दगी बचपन की ओर हा चल पड़ी करने यादो को ताजा! रोना-धोना, खुशियाँ, चकल्लसः, मनोरजंन, लड़ना-झगड़ना यही से शुरुआत होती है बचपन की, जहाँ न तो कोई चिंता है, न ही भ्रम ! …

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