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Tag Archives: think writer think

सपनों का सौदागर सुब्रत राॅय सहारा

subrat

पिछले तीन साल से सहारा समूह पर सेबी की वक्र दृष्टि है। दो साल तक जेल में रहने के बाद आजकल सुब्रत राॅय बेल पर चल रहे हैं। सेबी ने सहारा की वित्तीय योजनाओं पर धन जमा कराने पर रोक लगा रखी है। साथ पुराने खाताधारकों का बकाया धन वापस …

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सुप्रीम कोर्ट के आदेश को जनता का तमाचा

diwali

विनय गोयल के विचार नयी दिल्ली। आजतक हम लोगों को यह भ्रम था कि उच्चतम न्यायालय के आदेश अवहेलना करने की हिमाकत करना किसी के बस की बात नहीं है। लेकिन दिल्ली की जनता और सरकारों ने यह साबित कर दिया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश उनके लिये कोई मायने …

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मोदी सरकार के बेवकूफ मंत्री

min health

मोदी सरकार के बहुत मंत्री ऐसे हैं जो अपने बेवकूफी के लिये जाने जाते हैं ऐसे ही एक राज्य मंत्री हैं अश्विनी चौबे उन्होंने फरमान दे कर अपनी और सरकार की फजीहत करा डाली कि बिहार से आने वाले लोगों को एम्स में प्रवेश करने की अनुमति न दी जाये। …

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पत्रकारिता के दोहरे चरित्र से सामना

Indian Journalism

जनसत्ता एक्सप्रेस में काम करने का अनुभव मेरे लिये काफी अहम् रहा। यहां नामचीन पत्रकार रवींद्र सिंह, सुरेश बहादुर सिंह, आलोक मेहरोत्रा व प्रेम नारायण मिश्र के सानिध्य में बहुत सीखने का अवसर मिला। यहां अरुण सक्सेना, प्रतिभा कटियार प्रणय मोहन सिन्हा आदि मेरे लिये आलोक सर स्वतंत्र भारत, धर्मयुग …

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आज के युवाओं में डिप्रेशन क्यों

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आज से दो तीन दशकों पहले मानसिक तनाव, अवसाद या डिप्रेशन आदि सुना भी नहीं जाता था। लेकिन आज मेट्रो सिटीज में अक्सर सुना जाता है कि युवावर्ग डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं। मानसिक तनाव और अवसाद से प्रभावित होकर अपनी जान देने की कोशिश कर रहे हैं। डिप्रेशन, …

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पत्रकारिता के मायने पार्ट 2- पत्रकारिता के खट्टे मीठे अनुभव

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पत्रकारिता की दूसरी पाठशाला मेरे लिये जनसत्ता एक्सप्रेस रहा। यहां प्रवेश करना भी मेरे लिये काफी संघर्षपूण रहा। 2001 यूपी की राजधानी से इस अखबार के प्रकाशन के लिये इंडियन एक्सपे्रस समूह ने विराज प्रकाशन से करार किया। विराज प्रकाशन ने संपादकीय विभाग की जिम्मेदारी दिवंगत वरिष्ठ पत्रकार घनश्याम पंकज …

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वो दिन भी क्या दिन थेः रामलीला व दशहरे का रहता था इंतजार

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बात उन दिनों की है जब मैं कानपुर में अपने परिवार के साथ रहता था। हम सभी भाई बहनों को बेसब्री से इंतजार रहता था। खासतौर से दशहरे का। वो इस लिये कि घर वाले पूरे दस दिनों तक हमें रात में घूमने की छूट देते थे। घर के आसपास …

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मेरे लिये पत्रकारिता के मायने

journalism

पत्रकारिता के नाम से पहले लोगों को सम्मान मिलता था। लेकिन आज के हालात में सिर्फ लोगों की निगाह में पत्रकार एक दलाल या बिना रीढ़ का जीव समझते हैं। आज के डिजिटल युग में पहली वाली बात नहीं रह गयी है। आप को भाषा विषय की जानकारी हो न …

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संवेदनहीन होते राजनेता…

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गुरुग्राम के रेयान इंटरनेशनल स्कूल में प्रद्युम्न की हत्या और उसके ठीक अगले ही दिन दिल्ली के टेगौर स्कूल में 5 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म की घटना ने आम आदमी को अंदर तक हिला कर रख दिया है। आम आदमी इन हादसों के बाद से इतना आहत हुआ …

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अमर सिंह तलाश रहे राजनीतिक ठिकाना

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पूर्व सपा नेता और राज्य सभा सदस्य अमर सिंह की परेशानिया बढ़ती जा रही हैं। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया है। राज्यसभा में वो बिना दल के सांसद हैं। वहां भी उनकी कोई वकत नहीं है। तब से वो अपने राजनीतिक ठिकाने …

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