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मंदिर निर्माण को लेकर संत समाज और सरकार में रस्साकशी

नयी दिल्ली। अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण को लेकर ही भाजपा हमेशा केन्द्र व यूपी में सरकारें बनाती आयी है। चाहे वो आम चुनाव हो या विधानसभा चुनाव भाजपा ने मंदिर और हिन्दूवादी सोच को आगे कर प्रचार किया है। उनकी सरकारें बनवाने में संत समाज व हिन्दूवादी संगठनों की अहम् भूमिका रही है। पिछले साल यूपी में बीजेपी ने अपने सहयोगी दलो के समर्थन से ऐतिहासिक व प्रचंड बहुमत वाली सरकार बनायी। यह भाजपा के लिये गर्व और खुशी की बात मानी जा रही थीं लेकिन वर्तमान में संत समाज और हिन्दू संगठनों ने यूपी सरकार की चूलें हिला कर रख दी हैं। ये लोग इस बात पर अमादा हैं कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण शीघ्र कराया जाये।

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने संतो ंके एक कार्यक्रम में यह आश्वासन दिया कि राम मंदिर तो अयोध्या में ही बनेगा। लेकिन उसके लिये थोड़ा धैर्य रखना होगा। भारत एक लोकतांंित्रक देश है जो न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका के हिसाब से संचालित किया जाता है। हमें उपरोक्त सभी की मर्यादाओं का ध्यान रखना होगा। भगवान श्रीराम मर्यादा के प्रतीक हैं और संतजन श्रीराम के प्रतिनिधि हैं हम सभी को समस्याओं का समाधान मर्यादाओं में रह कर करना होगा।

ल्ेकिन संतगण और विहिप को योगी की नसीहतें रास नहीं आ रही हैं। रामजन्म भूमि न्यास से जुड़े पूर्व सांसद रामविलास वेदांती ने साफ लहजें में सरकार और मुख्यमंत्री को चेता दिया है कि अदालत का फैसला मंदिर के पक्ष में आये या विपक्ष के मंदिर का निर्माण इस साल के अंत और आम चुनाव के पहले शुरू हो जायेगा। इस बात का आश्वासन मैं दे रहा हूं। वेदांती के भाषण के समय योगी मंच पर ही बैठे थे।
वहीं दूसरी ओर विहिप के कार्याध्यक्ष आलोक कुमार ने भी वेदांती के सुर में सुर मिलाते हुए यह बयान जारी किया है कि हमें उम्मीद है कि साल के अंत तक राम मंदिर का निर्माण हो जायेगा। अगर ऐसा नहीं हुआ तो विहिप एक राष्ट्रव्यापी जनांदोलन चलायेगी।

विनय गोयल की रिपोर्ट

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