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सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान लगाते आतंकी हमले

भारत दुनिया के उन गिने-चुने देशों में से एक है जहां पर हर मज़हब को बराबरी के साथ रहने का हक़ है, यानि अगर किताबी भाषा में कहें तो भारत धर्मनिर्पेक्ष मुल्क है। भारत में हर धर्म और हर मज़हब के लोगों को अपना धर्म मानने की पूरी आज़ादी है। मगर बावजूद इसके कुछ मतलब परस्त लोग भारत के अमन और चैन पर बुरी नज़र लगाये बैठे रहते हैं। इनमें पड़ोसी देश पाकिस्तान की तो बात ही अनोखी है।

पाकिस्तान तो हर वक्त इसी फिराक में लगा रहता है कि किसी भी तरह से भारत की एकता को भंग किया जाये। पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद हर समय भारत में लोगों के बीच नफरतें बढ़ाने में लगा हुआ है।

ख़ैर इसका ज़िक्र हमें इसलिये करना पड़ रहा है क्योंकि आतंकियों ने एक बार फिर से कश्मीर में आर्मी कैंप पर हमला करके भारत के धैर्य को ललकारा है। शुरूआती जानकारी के मुताबिक इस महले में 17 जवान शहीद हुए हैं। वैसे इसके बाद फिर से हमारे नेताओं की जुबान इस मुद्दे पर खुलने लगी है लेकिन क्या सिर्फ बातों से ही इस विकराल समस्या का समाधान हो पाएगा।

वाकई हमारे देश को चलाने वाले नेताओं के भड़कीले बयान तो जरूर इस तरह के हमले पर आते हैं लेकिन ज़मीनी स्तर पर होता कुछ नहीं है। हर बार हमले के बाद जांच किये जाने की बात तो कर दी जाती है लेकिन जांच होने के बाद भी उस जांच पर किस तरह का एक्शन होता है यह किसी से छुपा हुआ नहीं है।

अब सवाल यह भी उठता है कि बार-बार हो रहे आतंकी हमले हमारी सुरक्षा की पोल भी पूरी दुनिया के सामने खोल रहे हैं। बहरहाल अब देखना यही होगा कि क्या आने वाले दिनों भारत की तरफ से सिर्फ बातचीत का दौर ही चलता रहेगा या फिर कोई ठोस कदम भी उठाया जाता है।

लेखक के निजी विचार…

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