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…तो टूट जायेगा अकाली बीजेपी गठबंधन, बीजेपी नेताओं के सुर बिगड़े

नयी दिल्ली। हरियाणा सरकार के मंत्री व भाजपा के दिग्गज नेता अनिल विज ने अकाली दल पर हमला बोलते हुए कहा कि पंजाब में अकालियों की हार हुई न कि भाजपा की। भाजपा केवल 10 प्रतिशत जगहों पर चुनाव लड़ी थी। अकालियों की कमजोर कन्वेसिंग और खराब प्रशासन की वजह से पंजाब में कांग्रेस के प्रत्याशियों की भारी संख्या में जीत हुई है। पंजाब की हार में भाजपा की कोई भूमिका नहीं है। लगता है कि भाजपा का अकाली दल से मोहभंग होता जा रहा है। या यूं कहा जाये कि भाजपा सिर्फ अच्छे दिनों के लिये ही गठबंधन करने की चाह रखती है।
देश में पांच राज्यों के चुनाव परिणाम आ चुके हैं। चार राज्यों में भाजपा व उनके सहयोगी दल सरकारें बनाने जा रहे हैं। केवल पंजाब ही एकमात्र ऐसा राज्य है जहां भाजपा अकाली दल के गठबंधन को हार का मुंह देखना पड़ा है। ऐसे में भाजपा नेताओं ने अकाली दल को अनाप शनाप बातें सुनाना शुरू कर दिया है।

भाजपा के ये नेता शायद भूल गये हैं कि पंजाब में उनकी हैसियत अकालियां के दम पर है। वहां न भाजपा को कोई दिग्गज नेता है और न ही संगठन। ऐसे में बीजेपी किस दम पर पंजाब में अलहदा सरकार बनाने की डींग हांक रहे हैं। वैसे इस तरह से बयानों ने अकालियों के गुस्से को बढ़ाने का काम किया है। भाजपा के तीन उम्मीदवार ही विधायक बन सके हैं। पंजाब में कांग्रेस की आंधी में अकाली बीजेपी के उम्मीदवारों के पैर उखड़ गये और कांग्रेस को प्रचंड बहुमत मिल गया है।

अकाली बीजेपी गठबंधन की हैसियत इस बात से लगाया जा सकता है उन्हें तीसरा स्थान मिला है। आम आदमी पार्टी को भी अकाली भाजपा गठबंधन से अधिक उम्मीदवार जीत कर विधान सभा पहुंचने में सफल हुए हैं। विशेषज्ञां की मानें तो इस गठबंधन का हाल भी शिवसेना जैसा होने वाला है। 25 सालों भाजपा-शिवसेना का गठबंधन भी इन बयान बहादुरों की वजह से ही टूटा है। आज हालात यह है कि दोनों दलों के नेता एक दूसरे को नीचा दिखाने का कोई मौका नहीं चूकते हैं।

विनय गोयल की रिपोर्ट

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