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हाई कोर्ट के आदेशों की अनदेखी कर सरकार ने बाबा समर्थकों को दिया अभयदान

नयी दिल्ली। डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम के दोषी करार देने के बाद से ही उनके चाहने वालों ने आंखें फेरनी शुरू कर दी हैं। जिस सरकार की पूरी कैबिनेट बाबा के चरणों में लोटती रही वही आज उनके खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं। बाबा की शरण में क्या बीजेपी और क्या कांग्रेस सभी के दिग्गज नेता बाबा के डेरे में चरण वंदना करते थे। हरियाणा में बीजेपी की सरकार बनने से पहले अध्यक्ष अमित शाह ओर खट्टर ने बाबा के पैर पकड़ते हुए अपनी पार्टी के लिये समर्थन मांगा था। हरियाणा में सरकार बनने के बाद खट्टर अपनी कैबिनेट को लेकर बाबा से आशीर्वाद लेने डेरे पर गये थे। 15 अगस्त को बाबा का जन्मदिन मनाया जाता है। इस बार उनके जन्मदिन पर हरियाणा सरकार के दो दिग्गज नेता व मंत्री अनिज विज और राम विलास शर्मा बाबा से आशीर्वाद लेने पहुंचे और सरकार की ओर से बाबा को 51 लाख रुपये भेंट किये।

हाई कोर्ट अपने आदेश में साफ कहा था कि प्रदेश में किसी भी प्रकार की हिंसा में किसी की जान गयी तो डीजीपी पर कार्रवाई की जायेगी। हरियाणा में बीजेपी सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश को हल्के में लिया और प्रशासनिक चूक के कारण पंचकुला में बाबा समर्थक हजारों की संख्या में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट के पास जमा हो गये। सरकार का दावा है कि प्रदेश पुलिस ने किसी भी की आशंका से निपटने के लिये सुरक्षा के सारे इंतजाम किये थे। सरकार ने खानापूरी के लिये पंचकुला के एक डीएसपी को सस्पेड किया है जबकि इतने बड़े पैमाने पर हुई हिन्सा के लिये दोषी नहीं ठहराया जा सकता है। यह कार्रवाई सिर्फ पुलिस महकमे के बड़े अफसरों को बचाने के लिये किया गया। अगर सरकार ने सुरक्षा व समर्थकों से निपटने के सारे इंतजाम किये थे तो पूरे प्रदेश में बाबा के गुडों ने कैसे उपद्रव मचाया। समर्थकों ने पुलिस की मौजूदगी में मीडिया व सरकारी संपत्तियों को तोड़ा और आग के हवाले किया। पुलिस केवलमूक दर्शक बन कर खड़ी रही।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 32 लोगों की मौत हुई है जबकि स्थानीय अस्पतालों में शवों को आना जारी है। सरकार का यह भी दावा है कि मारे गये सभी लोग पुलिस की गोलियों से मारे गये है। केन्द्र सरकार व पार्टी के दिग्गज नेताओं ने खट्टर सरकार को क्लीन चिट देते हुए कहा कि सरकार ने हालात पर तुरंत काबू पाने के लिये हर संभव प्रयास किया। सीएम ने कोई भी लापरवाही नहीं बरती। उन्हें हटाने का सवाल ही नहीं उठता है।

बीजेपी के एक सांसद साक्षी महाराज ने बाबा के समर्थन में कोर्ट के बारे में विवादित टिप्पणी देते हुए कहा कि एक आदमी की शिकायत पर बाबा के खिलाफ इतना बड़ा फैसला लिया गया। करोड़ों बाबा के भक्तों की भावनाओं का कोर्ट ने ध्यान नहीं रखा। दंगे इसी वजह से हुए। इसमें सरकार की कोई गल्ती नहीं है। इसी तरह का बयान बीजेपी के महासचिव कैलाश विजय वर्गीय ने बाबा के समर्थन में देते हुए कहा कि यह हिन्दू धर्म को बदनाम करने की साजिश है। इन नेताओं को बयानों को देखते हुए यह अंदाज लगाया जा सकता है कि सत्ता पाने और कायम रखने के लिये राजनीतिक दल किस हद गिर सकते हैं।

विनय गोयल की रिपोर्ट

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