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स्मार्ट मोबिलिटी में जन सहयोगिता की अहमियत

नयी दिल्ली। 2030 तक भारत 37 प्रतिशत कार्बन दुष्प्रभाव को कम किया जा सकता है। 64 प्रतिशत बिजली, अनुमानित जमीन आधारित ऊर्जा को बचाया जा सकता है। इस कार्य में जनसहयोगिता की अहम् भूमिका होगी। इससे न केवल 150 मिलियन टन पेट्रो उत्पाद और चार लाख करोड़ आर्थिक बचत भी होगी। साथ ही पर्यावरण में भी सुधार होगा। 2017 से 2030 तक 876 मिलियन पेट्रो प्रोडक्ट्स की बचत होगी। साथ ही इस मद में खर्च होने वाले 22 लाख करोड़ रुपये की बचत भी होगी। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वातावरण में मौजूद कार्बन डाइ आक्साइड की मात्रा में एक गीगाटन कमी भी आयेगी।

इस विषय पर दिल्ली में स्मार्ट मोबिलिटी और जन सहभागिता पर आधारित एक दो दिवसीय सेमिनार को आयोजन 4 दिसंबर से किया जा रहा है। दिल्ली में आयोजित आर्थिक गति स्मार्ट मोबिलिटी समिट, हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहनों, वैकल्पिक ईंधन, इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम, ट्रैफिक सेफ्टी एंड सिक्योरिटी, मास परिवहन, रोड इंफ्रास्ट्रक्चर एंड कंस्ट्रक्शन पर ध्यान केंद्रित करेंगे। उद्योग से कुछ प्रतिष्ठित नेता द इकोनॉमिक टाइम्स – स्मार्ट गतिशीलता शिखर सम्मेलन में बोल रहे हैं।

उद्योग से कुछ प्रतिष्ठित नेता द इकोनॉमिक टाइम्स- स्मार्ट गतिशीलता शिखर सम्मेलन में बोल रहे हैं। मुख्य कार्यकारी अधिकारी, नीती कार्यक्रम अमिताभ कांत,  राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा परिषद में सदस्यडॉ कमल सोई, सह-संस्थापक और सीईओ – ज़ूमकार ग्रेग मॉरन,  स्मार्ट सिटीज मिशन, राष्ट्रीय टीम लीडर उत्पल डेका, बिजनेस हेड यूनिट, मोबिलिटी मैनेजमेंट, सीमेंस मनीष अग्रवाल, स्मार्ट सिटीज, पीडब्ल्यूसी इंडिया चेतन मेनई, उपाध्यक्ष, एसएन मोबिलिटी मूर्ति एनएसएन, पार्टनर एंड लीडर पूर्व अध्यक्ष, ईईएसएल केके शर्मा,  कॉर्पोरेट सलाहकार निसान मोटर्स अरुण मल्होत्रा, – मोबिलिटी, मध्य पूर्व, उत्तरी अफ्रीका और दक्षिण एशिया, फ्रॉस्ट एंड सुलिवन निदेशक कौशिक माधवन हैं।

विनय गोयल की रिपोर्ट

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