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वो टीचर जो मुझे याद हैं…

जहां तक मुझे याद है कि प्राइमरी से इंटर तक कुछ अध्यापकों ने मेरे मन को छुआ है। उनमें सबसे ऊपर ज्ञान निकेतन स्कूल की प्रिंसिपल सुरजीत कौर हैं जिनकी वजह से आज मैं तिना बन सका हंू सब उनकी सख्ती और पढ़ाने का ही फल है। उनकी पढाई ग्रामर की वजह से आज मैं इंग्लिश में थोड़ी बहुत पकड़ बना पाया हूं। वैसे आपको बताना चाहता हूं कि मैं पढ़ने में बहुत अच्छा नहीं था। गणित विषय मेरे लिये सबसे डराने वाला होता था। संस्कृत विषय मेरा सबसे पसंददीदा होता था। आर्ट व इस विषय में सबसे अधिक नंबर आते थे। इस विषय को सुमन सेठ पढ़ाती थी। उनका प्रभावी व्यक्तित्व आज भी मेरी स्मृतियों में है। उनकी निगाह में गलती करने वाले के लिये सजा एक ही रहती थी चाहे वा लड़का या लड़की जमकर कुटाई करती थीं। दूसरे टीचर आरके त्रिपाठी से थे जो बुक क्राफ्ट के अलावा गणित भी पढ़ाते थे। गलती करने या काम पूरा न होने पर चार डस्टर की सजा तय थी।
एक टीचर का अगर जिक्र नहीं किया तो मेरी जिंदगी में कुछ खाली पर रह जायेगा। उन दिनों में छठी या सातवीं क्लास का स्टूडेंट था। मुझे सुषमा शर्मा नामकी एक टीचर सामाजिक विज्ञान पढ़ाती थीं। उनका स्नेह क्लास के सभी बच्चों को बहुत अच्छदा लगता था। विशेष तोर पर मुझे तो काफी भाता था। वो भी मुझे विशेष रूप से स्नेह करती थी। उनकी हर बात मुझे काफी भाती थीं। उनकी जब शादी हुई तो मुझे ऐसा लगा कि अब मेरे जीवन कितना खाली हो गया। जिस दिन मैम आखिरी बार क्लास में आयीं उस दिन उनसे बिछुड़ने की वजह मेरी आंखों में आंसू थे। वो मेरी सबसे प्रिय टीचर रहीं आज भी उनकी स्मृतियां मेरे जेहन में बसी हुई हैं।

विनय गोयल के विचार

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