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समय बदल गया…

बचपन के वो दिन,

आज भी पुकारते हैं,

सोच वही है, समय बदल गया।

अपनी यादों को समेटे हुए,

प्यार से दुलारते हैं,

प्यार वही है, समय बदल गया।

धुंधली आंखों से बुढापे में,

आज भी बुलातें हैं,

नज़रिया वही है, समय बदल गया।

बाहें फैलाये हुए,

आज भी गले से लगाते हैं,

अंदाज़ वही है, समय बदल गया।

बात-बात पे पहले की तरह,

आज भी समझाते हैं,

मिसाल वही है, समय बदल गया।

बचपन से जवानी आई,

आज भी डराते हैं,

मिजाज वही है, समय बदल गया।

बुढापे में परिवार को बांधे हुए,

आज भी रखते हैं,

रूतबा वही है, समय बदल गया।

बदलते हुए समय का खेल,

आज भी समझाते हैं,

सबकुछ वही है, समय बदल गया।

 

एस. प्रसाद

एक पिता का अंदाज़ अपने बच्चों के लिये मरते समय तक वही होता है लेकिन समय बदलता रहता है। बच्चे सोचते हैं कि हम बड़े हो गये हैं लेकिन पिता की नज़रों में वो हमेशा बच्चे ही रहते हैं। जो लोग यह समझते हैं कि हम बड़े हो गये  हैं वो अपने पिता के सम्मान के लिये पिता के सामने अपने आप को बच्चे समझें, तो पिता का जीवन सार्थक हो जाये।

 

 

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