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अजय की ज़िंदगी बचाने के लिये आरिफ ने रोज़ा तोड़कर जो किया…

एडविन अमन की रिपोर्ट

नयी दिल्ली।कई बार हम लोगों को यह कहते हुए सुनते हैं कि इंसानियत से बड़ा कोई मज़हब नहीं होता लेकिन अगर इस बात की सच्ची मिसाल किसी ने पेश की है तो वो हैं देहरादून के आरिफ। असल में उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में आरिफ नाम के एक शख्स ने रोजा तोड़कर रमजान के मुबारक महीने में एक जरूरतमंद की जान बचाने का बहुत बड़ा काम किया है। वैसे आपको यहां यह बताना भी जरूरी हो जाता है कि आरिफ नैशनल एसोसिएशन फॉर पैरेंट्स एंड स्टूडेंट्स राइट्स के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं जिन्होंने इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए ऐनवक्त पर खून  देकर मौत से लड़ रहे एक मरीज की जान बचा ली।

वैसे अगर आरिफ की जुबानी आपको इस बारे में बतायें तो वो कहते हैं कि उन्हें व्हाट्सएप पर एक संदेश मिला जिसमें लिखा था कि अजय जो मैक्स हॉस्पिटल देहरादून के आईसीयू में एडमिट है और उनकी प्लेटलेट 5000 से भी कम हो गई हैं। मरीज को बचाने के लिये तुरंत ‘ए+’ ब्लड ग्रुप का खून चाहिये। साथ ही इस संदेश में यह भी लिखा हुआ था कि अगर शाम तक खून नहीं दिया गया तो मरीज की जान को खतरा हो सकता है। वहीं जब यह संदेश पढ़कर आरिफ ने अस्पताल से संपर्क किया तो वहां से यह बात सुनने को मिली कि अगर आप रोजा तोड़ दें तो अजय को खून दे सकते हैं।

इसके बाद रोज़ा बिना देरी किये आरिफ ने खून देने के लिये रोजा तोड़ने की हामी भरते हुए कहा कि अगर ऐसा करके किसी की जान बच सकती है तो वो इंसानियत का फर्ज़ जरूर निभाएंगे। फिलहाल इस मामले ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि धर्म और मज़हब जैसे बंधनों से ऊपर उठकर हमें समाज के लिये ऐसा कुछ जरूर करना चाहिये जो मिसाल कायम कर सके।

 

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