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मानवीय जीवन में सत्य, अहिंसा, प्रेम, शांति व धर्म मूल मंत्र

दक्षिण भारत में साईं बाबा के भारी तादाद मंे सर्मर्थक बसे हुए हैं। आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक में बाबा की महिमा, शिक्षा और दीक्षा का अच्छा खासा प्रभाव देखा जाता है। कहा जाये कि इन प्रदेशों में साईं बाबा को लोग भगवान मानते हैं तो गलत नहीं होगा। साईं बाबा ने आम लोगों की सेवा में अपना पूरा जीवन लगा दिया। समाज के उस तबके को शिक्षित करने और उनके आर्थिक स्तर को उठाने में साई बाबा की संस्था सतत् प्रयास में लगी हुई है। संस्था के समर्थक और कर्मठ कार्यकर्ता आश्रम में सेवा कर अपना जीवन धन्य समझते हैं। बाबा की मान्यता है कि भगवान की सेवा करनी हो तो पहले सर्व सामान्य की सेवा करो। सत्य साईं बाबा जीवन के पांच मानवीय मूल्य मान्यताओं सत्य, धर्म, शांति, प्रेम और अहिंसा को प्राथमिकता देते हैं। बाबा ने लोगों जागरूक करने के लिये पहले आत्मजागरण किया इसके बाद लोगों को आत्ममंथन और आत्मानुभव करने के लिये प्रेरित किया।

सत्य साईं बाबा का मानना है कि लोगों को धर्म का वास्तविक अर्थ नहीं मालूम है। रिलीजन का सही अर्थ रियलाइजेशन से है। यानी अपने आप को पहचानना। आत्मानुभूति करना। जब तक मानव अपनी आत्मा की आवाज को नहीं सुनेगा तब तक वो भगवान को प्राप्त नहीं कर सकता है। आज लोग धर्म के नाम पर न जाने कितना आडंबर करते हैं। धर्म के नाम पर लोगों का बहिष्कार करते हैं। धार्मिक उन्माद में हिंसा और उत्पात मचाते हैं।

किसी भी धर्म में यह नहीं कहा गया है कि किसी अन्य धर्म का अपमान करो उसे कमतर मानें। कोई भी धर्म झूठ बोलने और हिंसा करने की शिक्षा नहीं देता है। सभी धर्मों में जीवों पर दया करना, किसी पर अत्याचार न करना और समाज में सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा देने पर बल दिया जाता है। सदाचार और सभी से शांति, प्रेम, सद्भाव, सत्य और अहिंसा को अपनाने की बात हर धर्म में कही गयी है। गीता में कहा गया है कि धर्म उसकी रक्षा करता है जो उसकी रक्षा करता है। उपनिषद में कहा गया है कि सदा सत्य बोलो। मां का सम्मान भगवान के समान करो। पिता व गुरु का सम्मान देवता के समान करो। घर पर आने वाला अतिथि देव के समान होता है।

विनय गोयल

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