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UP Election 2017 : पश्चिमी उत्तर प्रदेश में क्यों हैं बीजेपी और मुसलमानो के बीच दूरियां!

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुस्लिम मतदाताओ की संख्या सबसे ज़्यादा है, यहाँ करीब 26 फीसद मुस्लिम मतदाता हैं।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सियासी पार्टियां मुसलमानों को लुभाने में जुटी हैं. इसकी वजह भी है क्‍योंकि मुसलमान वोट सत्ता का खेल बनाने बिगाड़ने में अहम भूमिका निभा सकते हैं. विधानसभा की चाबी मुस्लिम समुदाय के हाथ में है,  हर सियासी पार्टी अपने आपको मुसलमानो के करीब बता रही है और अपने आपको मुसलमानों का मसीहा बता रही है और बीजेपी का ख़ौफ़ दिखा कर मुसलमानों को अपनी तरफ खीचना चाहती हैं।

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यही वजह है, बीएसपी ने पूरे यूपी में 104 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिए हैं और सपा और कांग्रेस के गठबंधन ने क़रीब 42 मुस्लिम उम्मीदवारों को चुनाव में उतारा है, लेकिन बीजेपी को ये उम्मीद है वोट बंट जाये और इसका सीधा फायदा उसे पहुंचे, बीएसपी की रैलियों में टोपियों की तादाद ज़्यादा  दिख रही है। समाजवादी पार्टी अपने आपको शुरू से ही मुस्लिमो की पार्टी बताती रही है और हम ये कैसे भूल सकते हैं एक दशक तक मुलायम सिंह यादव को मुल्ला मुलायम कहा जाता रहा है।

अखिलेश का मुस्लिमो का प्रेम कई मंचो से नज़र आता है वहीँ कांग्रेस प्रदेश में अपनी सियासी ज़मीन तलाशने के लिए साईकल पर सवार हो गयी है, लेकिन सवाल ये है के बीजेपी और मुसलमानों के बीच यह लकीर किसने खींच दी है, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुसलमान बीजेपी को सत्ता में देखना ही नही चाहते। जानकारों का मानना है कि मुस्लिम किसी एक पार्टी को खुल कर वोट नही करेंगे वो बीजेपी को हराने की रणनीति के मुताबिक वोट करेंगे. “मुसलमान अब रणनीति के तहत वोट करते हैं वो वोटिंग के पहले देखते हैं कि किस पार्टी का उम्मीदवार बीजेपी को हरा रहा है.” लेकिन अभी भी ज़मीन पर मुसलमानों का रुख साफ़ नहीं दिखता।

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जब मुसलमान शिक्षा और रोज़गार के लिए कहता है तब सेक्युलर पार्टियां  बुनियादी मुद्दों से दूर ले जा कर उन्हें धर्म के भंवर में फंसा देती हैं, मुसलमान मतदाता की वजह एक बीजेपी से दूर रहने की यह भी है की बीजेपी का धर्म को लेकर ध्रुवीकरण। बीजेपी के नेताओ के बड़बोलेपन ने भी मुसलमानों को हमेशा बीजेपी से दूर रखा है पश्चिमी उत्तर प्रदेश बहुत अति संवेदनशील रहा है इसके इतिहास में कई दंगे दर्ज हैं और इसी का सियासी पार्टियों ने फायदा उठाया है अब देखना ये होगा मुस्लिम मतदाता किस तरह से अपने आपको बीजेपी के क़रीब ले कर जाते हैं और उनके बीच की दूरियां खत्म होंगी क्योंकि यहाँ की मुस्लिम आबादी मूल सुविधाओ से अभी भी वंचित है।

काशिफ अली की रिपोर्ट

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