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यूपी चुनाव: श्मशान-कब्रिस्तान की बात सब कर रहे, जापानी बुखार की कोई नहीं

उत्तर प्रदेश में छठे चरण में पूर्वांचल के 9 जिलों की 49 सीटों पर मतदान होना है। चुनावी प्रचार भी अपनी चरमसीमा पर है। कोई गांव में कब्रिस्तान बनाने की बात कर रहा है तो कोई कहता है हर गांव में कब्रिस्तान बन सकता है तो, श्मशान क्यों नहीं। श्मशान कब्रिस्तान से बात आगे बढ़ी तो बिजली पर जा के अटक गई और कहा गया कि बिजली भी जाती और धर्म देखकर दिया जा रहा है। नेता जी ने कहा कि जब ईद पर बिजली दी जा रही है तो दिवाली पर क्यों नहीं, होली पर दी जा रही है तो रमजान के पाक महीने में क्यों नहीं।

आरोप प्रत्यारोप की राजनीति में नेता जी चुनाव प्रचार के समय लंबे-लंबे भाषण देते है लेकिन वो लंबे-लंबे भाषण सिर्फ राजनीतिक होते हैं इनसे जनता का दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं होता। पूर्वांचल में कल मतदान होना है लेकिन पूरे चुनाव प्रचार में किसी भी राजनीतिक दल और उनके नेताओं ने इंसेफ्लाइटिस यानी दिमागी बुखार से मर रहे लोगों को राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाया।

सरकारी आंकड़ों की मानें तो अकेले पूर्वांचल में प्रति वर्ष 600 से अधिक लोगों की मौत होती है और इससे सबसे ज्यादा पीड़ित देश का भविष्य बच्चे हैं, अगर दुर्भाग्यवश किसी बच्चे को इंसेफेलाइटिस हो जाए तो या तो उसकी मौत हो जाती है या फिर वो जिंदगी भर के लिए विकलांग हो जाता है।

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जानकारी देते चलें कि पूर्वांचल में पहली बार इंसेफेलाइटिस का मामला 1977 में सामने आया था लेकिन अभी तक इस बीमारी का कोई सफल ईलाज नहीं मिल पाया है। सन् 2014 में इंसेफेलाइटिस पर राष्ट्रीय प्रोग्राम भी बना मगर सरकारों की लचर व्यवस्था के कारण इसे अभी तक इसे लागू नहीं किया जा सका है। इस बात से इतना तो साफ हो जाता है कि हमारी सरकार जिसे हम चुनकर भेजते है वो जनता का कितना सरोकार करती है।

एक ऐसा ही बच्चा है राजन, गोरखपुर से करीब 54 किलोमीटर दूर, महाराजगंज में 17 वर्ष का राजन करीब 13 वर्षों से बिस्तर पर लेटा हुआ है। राजन की माता बताती हैं कि 2004 में उसे इंसेफेलाइटिस हुआ था तब से वो कोमा में है। राजन न तो चल सकता है, न बोल सकता है और ना ही उसके किसी अंग में हलचल होती है ये कह कर राजन की माता रोने लगती है। डॉक्टरों के मुताबिक राजन अब कभी ठीक नहीं हो सकता है। न जाने ऐसे कितने राजन होंगे जो अपना बचपन भी ठीक से नहीं जी पाए हों
गे और इस बीमारी की चपेट में आकर मौत के मुह में समा चुके होंगे। रिपोर्टस की मानें तो इंसेफेलाइटिस पूर्वांचल की सबसे बड़ी समस्या को तौर पर अभी तक बराकरार है।

लेकिन चुनाव प्रचार में जुटे पीएम मोदी को इस बात की खबर है ना ही सूबे के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को। हर साल हजारों बच्चों को मौत की fever-ward-759नींद सुलाने वाली यह बीमारी लोकसुभावन चुनावी मुद्दों में खुद ही कहीं गुम हो कर रह जाती है।

गोरखपुर के ड़ॉ. आरएन सिंह ने बताया कि उन्होंने स्थानीय लोगों के साथ मिलकर इंसेफेलाइटिस को खत्म करने के लिए जनता का घोषणा पत्र तैयार किया है और वो प्रचार करने वाले हर नेता को अपना घोषणा पत्र बाटंते है।

बता दें कि इंसेफेलाइटिस धान में पाए जाने वाले मच्छरों के कारण होता है। इसके ज्यादातर मामले अप्रैल के महीने से लेकर जुलाई तक सामने आते हैं। हमारा देश के तमाम नेताओं से सवाल सिर्फ इतना है कि इनके पास श्मशान से लेकर कब्रिस्तान तक जैसे मुद्दे हैं, लेकिन क्या ये नेता बच्चों के लिए इंजेक्शन का इंतजाम करवाने वाले मुद्दे को लोगों के सामने नहीं रख सकते, जिससे हजारों बच्चों की जिंदगियां बच सकें।

लव कुमार के निजी विचार 

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