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यूपी को मोदी का साथ पसंद है

देश में पांच प्रदेशों के चुनाव परिणाम आने को ही है, लेकिन रुझानों को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि यूपी को मोदी का साथ पसंद है। प्रदेशवासियों ने अखिलेश के काम को वरीयता न देते हुए बीजेपी के कमल को सिर माथे लिया है। इस चुनाव परिणाम ने बसपा के वजूद पर ही सवाल लगा दिया है। आम चुनाव के परिणाम यूपी के लिये ऐतिहासिक बन गये हैं। यूपी फतह करने के बाद मोदी के उपलब्ध्यिं में एक और मील का पत्थर जुड़ गया है। प्रदेश अन्य राजनीतिक दलों को इस बात पर मंथन करना होगा कि उनसे कहां चूक हुई जिसका खामियाजा उठाना पड़ा है।
इन चुनाव परिणामों में अगर किसी ने अहम् किरदार निभाया है वो हैं अमित शाह। जिन्होंने प्रदेश के अतिम कार्यकर्ता को एक सूत्र में पिरोने का काम किया है। शाह ने चुनावी मैच जिताने के लिये जो बिसात बिछायी उसके लिये उनकी तारीफ की जानी चाहिये। इसका मतलब नहीं कि इन चुनावी परिणामों में पीएम मोदी की मेहनत को नकार दिया जाये।

मोदी ने आखिरी दौर के मतदान में जो धुंआधार प्रचार और प्रत्याशियों के प़क्ष में जन समर्थन मांगा वह अभूतपूर्व है। भले ही उनको ऐसा करने के लिये लोगों की निंदा का पात्र बनना पड़ा। वैसे बीजेपी अध्यक्ष शाह ने इस जीत का सेहरा मोदी सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं व पीएम के तीन साल के काम पर निचोड़ बताया है। साथ ही शाह ने उन करोड़ों कार्यकर्ताओं की मेहनत व लगन को सराहा जिसकी बदौलत उन्हें यूपी में इतिहास रचने में सफलता मिली है। मोदी ने चुनाव के आखिरी चरण में विनिंग शॉट जड़ कर बीजेपी के माथे पर जीत का तिलक लगवा दिया।
यूपी में आम चुनावों के परिणाम एक तरफ यह दर्शाते हैं कि यूपी में राष्ट्रीय पार्ट्रियों का वनवास खत्म हो चुका है। भाजपा लगभग 15 सालों बाद यूपी की सत्ता पाने में सफल हो सकी है।

लगभग तीन दशकों से प्रदेश में नेशनल पार्टियों को सत्ता से बाहर रहना पड़ा है। इस बीच प्रदेश में समाजवादी पार्टी बसपा का वर्चस्व कायम हो गया। यहां मुलायम सिंह और मायावती की सरकारें आती जाती रहीं। कांग्रेस और भाजपा दिनों दिन सत्ता अपनी वापसी की राह ताकती रहीं। आखिरकार आम चुनाव 2017 में भाजपा का यूपी से वनवास समाप्त हो गया है। प्रदेश में पूर्ण बहुमत से सरकार बनने जा रही है। अब सवाल यह है कि प्रदेश में भाजपा किसे मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपने जा रही है।

विनय गोयल के विचार

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