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यूपी के डीजीपी का भी आदेश नहीं मानता पुलिस कप्तान

नई दिल्ली। यूपी की राजधानी लखनऊ के पुलिस कप्तान दीपक कुमार पर सूबे के पुलिस
महानिदेशक  ओ. पी. सिंह के  आदेश की नाफ़रमानी करने का गंभीर आरोप लगा है। दीपक पर यह आरोप राजधानी लखनऊ निवासी प्रतिष्ठित समाजसेविका और आरटीआई कार्यकत्री उर्वशी शर्मा ने मुख्यमंत्री को भेजी एक शिकायत पर लखनऊ के एसपी ग्रामीण डा. गौरव ग्रोवर द्वारा दिए गए एक जबाब के आधार पर लखनऊ एसएसपी द्वारा राजधानी के 5 घूसखोर थानाध्यक्षों से   घूस खाकर
थानाध्यक्षों के खिलाफ महानिदेशक द्वारा शुरू की गई जांच को ठन्डे बस्ते
में दफन करने का आरोप लगाया है।
बकौल उर्वशी बीते मार्च महीने में यूपी के डीजीपी ओ. पी. सिंह ने लखनऊ के
पांच थानेदारों को भ्रष्टाचार के आरोप में लाइन हाजिर कर दिया था । सभी
पर फरियादियों से कमीशन लेने का आरोप था। कुछ लोगों ने ये आरोप लगाया था
कि फरियादियों की शिकायत सुनने और केस दर्ज करने के लिए पुलिस रिश्वत ले
रही थी। इस शिकायत पर डीजीपी ने गोमतीनगर, पीजीआई, हसनगंज, आशियाना और
आलमबाग के कोतवाल को लाइन हाजिर कर दिया था। कमीशन लेते हुए
पुलिसकर्मियों का वीडियो भी दिया गया था जिसके आधार पर जांच के बाद
कार्यवाही कराने की बात कही गई थी l एक्टिविस्ट उर्वशी  ने बताया कि
हेल्पलाइन 8081898081 पर उन्हें  बताया गया  कि घूस लेने वाले इन 5
थानेदारों का मामला घूस लेकर बिना जांच कराये ही बंद कर दिया गया था।
इसीलिये उन्होंने मुख्यमंत्री योगी को शिकायत भेजकर मामले में जांच पूरी
होने या न होने और यदि जांच हुई हो तो जांच के परिणाम से उन्हें अवगत
कराने  और अगर जांच नहीं हुई हो तो जांच को दबाने के दोषी अधिकारियों को
चिन्हित करके उनको दण्डित करने की मांग की थी।
उर्वशी ने बताया कि इस सम्बन्ध में उनको लखनऊ के एसपी ग्रामीण डा. गौरव
ग्रोवर द्वारा बीते 5 जून को हस्ताक्षरित करके भेजा गया पत्र मिला है
जिसे लखनऊ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दीपक कुमार द्वारा अनुमोदित किया गया
है।  इस पत्र के अनुसार प्रश्नगत  प्रकरण में आवेदिका श्रीमती उर्वशी
शर्मा पत्नी श्री  संजय शर्मा निवासिनी 102, नारायण टावर, एफ ब्लॉक,
राजाजीपुरम, जनपद लखनऊ द्वारा अपने शिकायती प्रार्थना पत्र में मुख्य रूप
से लखनऊ के पांच थानेदारो को भ्रष्टाचार के आरोप में लाइन हाज़िर कर दिया
गया था, इस सम्बन्ध में यदि की गयी जांच के परिणाम से अवगत कराने और अगर
जाँच नहीं हुई तो जांच को दबाने वाले अधिकारीयों को दण्डित करने के तथ्य
अंकित किये गए हैं। इस सम्बन्ध में सादर अवगत कराना है कि थानेदारो पर
अंकित भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच मेरे द्वारा नहीं की जा रही है।
थानेदारों की नियुक्ति एवं स्थानांतरण इस स्तर से नहीं किया जाता है,
बताया गया है।
उर्वशी कहती हैं कि बच्चा बच्चा जानता है कि थानेदारों की नियुक्ति एवं
स्थानांतरण एसएसपी स्तर से ही होता है और इसीलिये एसएसपी दीपक कुमार के
द्वारा अनुमोदित पत्र में ऐसा सफेद झूंठ बोलने से साफ है कि दीपक कुमार
ने घूसखोर  थानाध्यक्षों से घूस खाकर DGP के आदेश को आग लगाकर धुएं में
उड़ा दिया है और निजी स्वार्थ पूरे करने के लिए भ्रष्ट थानाध्यक्षों को
अभयदान दे दिया है। उर्वशी ने अब इस मामले की शिकायत सूबे के राज्यपाल
से करने और एसएसपी दीपक कुमार को दण्डित कराने की बात कही है।

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