Home / खुला खत / देश की राजनीति को ये क्या हो गया ?
rajniti

देश की राजनीति को ये क्या हो गया ?

राजनीति के बारे में कहा जाता है कि ये एक ऐसा दलदल है जिसमें कोई एक बार फंस जाए तो फंसता ही चला जाता है। और सत्ता की भूख लोगों पर इस कदर सवार होती है कि उनको कुछ भी समझ में नहीं आता। किसका अच्छा किसका बुरा, उनको बस जीत चाहिए, उनको कुर्सी चाहिए।

सत्ता और सत्ताधारियों की सोच क्या होती है इसे हम आम लोग नहीं समझ सकते। राजनीति की उथल-पुथल का एक उदाहरण राजस्थान के एक जिले धौलपुर में देखने को मिलता है। दरअसल वहां कुछ महीने पहले तक विधायकी सीट बहुजन समाज पार्टी के हाथों में थी। लेकिन उस समय के विधायक बनवारी लाल कुशवाह को हत्याकांड मामले में उम्रकैद की सजा हुई और साथ ही उनकी कुर्सी भी छिन गयी। कुशवाह की विधायकी बर्खास्त होने के बाद कुशवाह ने अपनी पत्नी शोभारानी को राजनीति के क्षेत्र में उतारा और भगवान की कृपा कहो या भाजपा की, उनको धौलपुर से भाजपा का टिकट मिल गया। 9 अप्रैल को धौलपुर में उपचुनाव हुआ जिसमें पूर्व विधायक की पत्नी को जीत मिली। पर सोचने वाली बात ये है कि क्या इस पूरे जिले में शोभारानी के अलावा भाजपा को कोई और प्रत्याशी नहीं मिला ? क्या कोई और उम्मीदवार नहीं मिला जो किसी भी अपराधी से दूर दूर तक कोई संबंध न रखता हो ? कहीं न कहीं ये मान लेना भी सही होगा कि भाजपा को भी पता था कि धौलपुर की विधानसभा सीट पर पार्टी हमेशा से कमजोर रही है। और इस बार किसी भी हाल में भाजपा को धौलपुर सीट पर जीत हासिल करनी थी।

सीएम राजे भी जानती थीं कि कुशवाह इस क्षेत्र में एक बाहुबली नेता हैं, इसी के कारण कुशवाह पर लगे आरोप को नज़रअंदाज करते हुए राजे के मंत्रिमंडल ने कुशवाह की पत्नी को बाजपा का टिकट देकर मैदान में उतारा। राजे के इस कदम को देखकर कथित तौर पर अफवाहें भी उड़ीं कि सीएम राजे को मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ सकता है। बाद में भाजपा नेता ओम प्रकाश माथुर ने मीडिया के सामने आकर इन अफवाहों का खंडन किया। इस बार का चुनाव वसुंधरा राजे के लिए इसलिए खास था क्यूंकि इस बार उनकी प्रतिष्ठा दाव पर लगी थी। क्योंकि 1993 में वसुंधरा ने जब यहां से चुनाव लड़ा था तब कांग्रेस के बनवारीलाल शर्मा के हाथों उनको शिकस्त मिली थी। इस बार का चुनाव राजे के लिए प्रतिष्ठा का चुनाव बन गया था।

इस उपचुनाव में विधायक पद के लिए 15 उम्मीदवार मैदान में थे लेकिन मुख्यत: मुकाबला भाजपा की शोभारानी और कांग्रेस के बनवारीलाल शर्मा के बीच था। धौलपुर सीट पर अपना कब्जा जमाने की होड़ में उपचुनाव के एक महीने पहले से ही यहां भाजपा और कांग्रेस के बड़े-बड़े मंत्रियों का जमावड़ा शुरु हो गया था। जिसके चलते शहर के सभी होटलों के कमरे फुल व सभी मुख्य सड़कों पर जाम लगा रहा। धौलपुर में शायद ही ऐसा कभी हुआ हो कि सारा राष्ट्रीय मीडिया और सभी राष्ट्रीय नेता तक वहां मौजूद थे। लेकिन सवाल ये है कि क्या ये कोशिशें विकास कराने के लिए की गई थीं ? क्या ये मेहनत विकास के लिए थी ?

प्रतिष्ठा का चुनाव या विकास का ये पता नहीं लेकिन शोभारानी ने वो कर दिया जो एक बार को सीएम भी नहीं कर पाई थीं। वाकई राजनीति में बहुत बदलाव आऐ हैं और बदलाव भी ऐसे जो समझ से परे हैं। वाह रे राजनीतिज्ञों क्या खूब बनाया है राजनीति का नया स्वरूप…

उपेन्द्र वशिष्ठ के निजी विचार..

Follow on Facebook: https://www.facebook.com/vashishtha.upendra   

Next9News

Check Also

subrat

सपनों का सौदागर सुब्रत राॅय सहारा

पिछले तीन साल से सहारा समूह पर सेबी की वक्र दृष्टि है। दो साल तक …