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…ये आग कब बुझेगी!

भारत में कहावत मशहूर है कि तिल का ताड़ बनाना या रस्सी का सांप बनाना। यह कहावत क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग पर पूरी तरह चरितार्थ हो रही है। गुरमेहर के मामले में सेहवाग ने एक ट्वीट क्या कर दिया कि उन्होंने घर बैठे मुसीबत मोल ले ली है। हालांकि सेहवाग ने अपने ट्वीट पर सफाई देते हुए यह भी कहा है कि भारत में अपनी बात कहने का अधिकार सभी को है इस पर कोई किसी को जान से मारने और बलात्कार करने की धमकी कैसे दे सकता है। ऐसी बातों से देश की छवि खराब हो रही है। लेकिन इसके बावजूद सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ अभियान सा छेड़ दिया गया है। उनके ट्वीट पर जेएनयू स्टूडेंट यूनियन नेता उमर खालिद ने जवाबी हमला करते हुए कहा कि सेहवाग भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के प्रतिनिधि हैं न कि पूरे भारत के।

उमर खालिद ने लिखा कि दिल्ली के हजारों छात्र और शिक्षक सड़कों पर उतरे हुए हैं; वो भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं ऐसे नये भारत का जिसका आधार समानता, न्याय व स्वतंत्रता पर निर्भर करेगा। उमर खालिद पर पिछले साल जेएनयू में आयोजित कार्यक्रम में देश विरोधी नारेबाजी के आरोप में जेल जा चुके हैं। इन दिनों वो जमानत पर हैं। उन पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज कराया गया था।

वहीं हरियाणा के एक मंत्री अनिल विज ने भड़काऊ बयान देकर आग में घी डाल दिया है जिससे मामला शांत होने के बजाय उग्र होता दिख रहा है। विज ने कहा कि जो लोग गुरमेहर के समर्थन में हैं वो पाकिस्तान समर्थक हैं। एक तरफ देश के गृहमंत्री राजनाथ सिंह किसी तरह मामले को शांत करने की बात कहते हैं वहीं हरियाणा में बीजेपी शासित सरकार के एक मंत्री ऐसा भड़काऊ बयान दे कर मामले को हवा देने का काम कर रहे है। ऐसे में क्या राजनाथ की मंशा पूरी होगी। इन बयानों से ऐसा लग रहा है कि सत्ता पाकर मंत्री व जनप्रतिनिधि बौरा गये हैं। उनकी इस तरह की बयानबाजी का खामियाजा यूपी में हो रहे आम चुनावों उठाना पड़ सकता है।

मालूम हो कि गुरमेहर के समर्थन कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल, माकपा के सीताराम येचुरी, एनसीपी के नेता व पूर्व सालिसीटर जनरल सोली सोराबजी ने बयान दे दिया है। अनिल विज ने अपने बयान से इन दलों को राजनीति करने का एक और मौका दे दिया है। ये सभी दल एकजुट होकर केन्द्र सरकार पर हमला करने की सोच सकते हैं। वैसे भी विपक्ष को तो सरकार को घेरने का मौका मिलना चाहिये। ऐसे में भाजपा नेता और मंत्री उन्हें हमला करने का अवसर देते जा रहे हैं।

इन सब बातों को जरा ध्यान से देखें तो पता चलता है कि नेताओं को किसी की परेशानी से मतलब नहीं होता। उन्हें तो किसी न किसी मुद्दे पर बयानबाजी करनी होती है। ऐसे में देश किन परिस्थितियों से गुजरेगा इसकी उन्हें कोई परवाह नहीं होती है। ऐसे में गुरमेहर और सेहवाग जैसे खिलाड़ी बेवजह नफरत की आग का शिकार हो रहे हैं। सांप्रदायिकता और आडंबर की यह आग कब और कैसे बुझेगी यह अबूझ पहेली है।

लेखक विनय गोयल 

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