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आखिर क्यों लग रही है बिहार बोर्ड पर सवालिया निशान?

बिहार देश का एक ऐसा राज्य है जहाँ शायद ही कोई परीक्षा हो कोई दाग ना लगे उसके ऊपर ! अभी हाल में हुऐ परीक्षा जैसे बिहार एसएससी, मल्टीटास्किंग, नीट तक के परीक्षा के प्रश्न पत्र लीक की गूंज रही है बिहार में। अभी हाल में बिहार देश के मिडिया के सुर्ख़ियो में बना हैं, कारण हैं “गणेश कुमार” (12th आर्ट्स टॉपर) और बिहार राज्य परीक्षा समिति।

पिछले वर्ष हुऐ टॉपर घोटाला की गूंज अभी शांत भी नही हुई थी की एकबार फिर बिहार की साख को बटा लगा । आखिर ऐसा बार बार क्यों हो रहा हैं?  कौन से कारण हैं। आखिर कौन से वो लोग है जो देश में बिहार को बदनाम करने पे तुले हुये हैं? खैर पूरी बात को समझने के लिये हमें कई पहलुओ पर नज़र दौड़ानी पड़ेगी।

बिहार  पहले से ही शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ा हैं। आज भी यहा विद्यालयो कमी हैं। छात्रो को दसवी में पढाई करने के लिए कोसों पैदल चल के जाना पड़ता हैं। जो विद्यालय है उनमे भी पुस्तकालय या प्रयोगशाला का आभाव हैं अगर सारी सुविधा उपलब्ध भी हैं तो योग्य शिक्षक का आभाव हैं यानि की कुल मिला कर बुनियादि सुविधा की घोर आभाव हैं।

पिछले वर्ष हुए घोटाले से सबक लेते हुए इस बार  बिहार सरकार ने परीक्षा को लेकर बड़े कड़े कदम उठायी थी नतीजा हुआ, मात्र 35 प्रतिशत ही विद्यार्थी उत्रिण हुए बाकी 65 % फेल हो गये । अब प्रतिदिन तरह तरह के बवाल खड़े किये जा रहे है। कुछ लोग बोर्ड पर सवाल खडा कर रहे हैं उनका कहना है की ये कैसे संभव है कि कोई छात्र बोर्ड परीक्षा में फेल कर जाये और jee mains में पास हो ? सवाल उठाना भी लाज़मी हैं ! कुल मिला जुला के बिहार बोर्ड में कुछ ना कुछ गड़बड़ जरूर है।

आखिर बिहार में शिक्षा क हालात इतने बुरे क्यों हैं ? इस बात को समझना उन लोगो के लिए बहुत ही जरुरी हैं जो वाकई में बिहार को राष्ट्रिय पटल पर  शिक्षित और गौरवशैली राज्य के रूप में देखना चाहते हैं। बिहार का शैक्षिक इतिहास बहुत ही धकड़ रहा हैं । विश्व प्रशिद्ध नालंदा विश्व विद्यालय की गौरवकाल को कौन नही जनता हैं। पिछले कुछ दशक तक देश में सबसे ज्यादा सिविल सेवा परीक्षा में पास करने वाले छात्र बिहार के होते थे। आज भी iit और मेडिकल एग्जाम में बिहार के छात्रो का बोलबाला होता हैं।

परंतु हाल के बर्षो में जिस प्रकार शिक्षा का व्यवसायीकरण और राजनीतिकरण हुआ है उसी का असर हैं, बिहार में शिक्षा का गर्त में जाना। सत्ता लोलुपो के द्वारा अयोग्य लोग को शिक्षक बना देना हो या स्कूलो में तरह तरह के योजना चला के लूट घसोट की मंडी बना देना बहुत से कारण है।   खिचड़ी, पोशाक, छात्रवृति योजना से लेकर साइकिल योजना तक की हाथ हैं शिक्षा के इस हालात का। रही सही कसर चुनाव जनगणना और तरह तरह के सर्वे में शिक्षको की ड्यूटी डाल कर के पूरी कर दी जाती हैं।

अब जरुरत है बिहार की जनता को जागने की ताकि फिर से बिहार में कोई रूबी राय और गणेश कुमार ना जन्म ले, टॉपर के लायक जो हो वो फेल कर दिया जाये, हर साल टॉपर लीस्ट बदला जाये

उज्जवल प्रताप सिंह के निजी विचार

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