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उच्चतम न्यायालय के जजों को प्रेसवार्ता क्यों करनी पड़ी

भारत के सवा अरब से अधिक लोगों की सुप्रीमकोर्ट पर गहरी आस्था है। उनकी आस्था है कि सुप्रीमकोर्ट से न्याय जरूर मिलेगाा। देश के हालात में न्यायपालिका में भी हालात दुरुस्त नहीं है। यही वजह है कि उच्चतम न्यायालय के चार जजों ने पत्रकारों के सामने व्यथा को बताया। जजों ने पत्रकारों के सामने इस बात को बताया कि यह देश के इतिहास में पहली बार हो रहा है कि उच्चतम न्यायालय के जजों को प्रेसवार्ता करनी पड़ी है यह अच्छी बात नहीं है। लेकिन हम इस बात को लेकर चिंितत हैं कि अगर हालात नहीं सुधरे तो देश में लोकतंत्र की रक्षा नहीं हो पायेगी। उच्चतम न्यायालय में हालात दिन ब दिन बिगड़ते जा रहे हैं। हमने प्रेसवार्ता करने से पहले सीजेआई से अपनी परेशानियों के बारे में लिखित शिकायत भी की थी लेकिन न्यायालय की व्यवस्था में सुधार नहीं होता दिखा आखिरकार हमें प्रेस के सामने अपनी व्यथा को बड़े ही दुख के साथ रखना पड़ा है। पे्रसवार्ता को जज जे चेलामेश्वर और रंजन गोगोई ने संबोधित किया। उनके साथ एससी के अन्य वरिष्ठ जज कुरियन और मदन सोकुर भी पत्रकारों के सामने आये।

मालूम हो कि पूर्व सीजेआई टीएस ठाकुर ने भी देश के पीएम मोदी कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद से न्यायपालिका की समस्याओं के बारे में अवगत कराया था। उन्होंने देश में न्यायधीशों की कमी और जजों की समस्याओं के बारे में भी बताया था। लेकिन न तो कानून मंत्री और न ही मोदी ने उन पर ध्यान दिया और न ही इस ओर कोई ठोस कदम उठाया गया। पूर्व सीजेआई टीएस ठाकुर ने इस बात पर भी दुख जताया कि पीएम मोदी ने 2016 के स्वतंत्रता दिवस के अपने लंबे चैड़े भाषण में न्यायपालिका की समस्याओं का जिक्र तक नहीं किया।

वरिष्ठ जज चेलामेश्वर ने बताया कि सीजेआई केसों के वितरण में भेदभाव बरता जा रहा है खास मामले अपने विश्वसनीय जजों को दिये जाते हैं। जो जज उनकी विचारधारा से मेल नहीं खाते हैं उन्हें कम महत्वपूर्ण मामले ही दिये जाते है। देश की सवा सौर करोड़ लोगों की आस्था जुड़ी है। लोग उन पर आत्मा बेचने का आरोप नहीं लगायें इस लिये हमने अपनी समस्याओं को सार्वजनिक तौर पर पे्रस के सामने रखा है। जजों की इस प्रेस वार्ता से साफ नजर आ रहा है सीजेआई राजनीतिक दबाव में न्यायालयों के निर्धारित नियम कायदों का पालन नहीं कर रहे हैं।

विनय गोयल के विचार

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