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क्या महागठबंधन अश्वमेघ यज्ञ का घोड़ा रोक सकेगा

पिछले आम चुनाव से पहले एनडीए के पीएम उम्मीदवार मोदी ने जनता के बीच घूम घूम कर अच्छे दिन आने का विश्वास दिलाया था। लेकिन साढे़ चार साल के मोदीकाल में देश का कोई भी वर्ग खुशहाल नहीं हैं। छोटे व्यापारियों को नोटबंदी व जीएसटी ने निपटा दिया है। शिक्षित युवाआंे राजेगार न मिलने से तनाव है। किसान आर्थिक विपन्नता के कारण आत्महत्या करने पर मजबूर है। महंगाई अपने विकराल रूप में देशवासियों को भयभीत कर रही है। रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम सातवें आसमान पर हैं। पेट्रोल, डीजल व रसोई गैस की कीमतों मं आग लग चुकी है। इस पर भी मोदी व केन्द्र सरकार के मंत्रियों के कानों पर जंू नहीं रेंग रही है। अब एनडीए के कुछ घटक भी महंगाई और पेट्रो प्रोडक्ट्स की बढ़ती कीमतों पर सरकार को आंख दिखान लगे हैं।

फिलहाल मोदी व उनके मंत्रीगण पूरे देश में अपनी सरकार की वाह वाही करते नहीं अघा रहे हैं उनके जनता के दुख दर्द से कोई वास्ता नहीं उन्हंें तो सिर्फ मोदी सरकार को दोबारा सत्ता में लाना है। इसके लिये आंकड़ों की बाजीगरी कर वो भोली भाली जनता को गाय, गोबर और धर्मांधता के जरिये एक बार फिर पूरे देश को भय का माहौल बनाना चाह रहे हैं। लेकिन पिछले साढ़े चार के मोदी शाासन में जनता ने इतना तो समझ लिया है कि गाय, गौमूत्र, भक्ति मंदिर और जातिवादी राजनीति समाज को तोड़ने वाले मुद्दे हैं। इस बात का अंदाजा यूपी में हुए उपचुनावों के परिणाम से जनता का रुख बयान कर रहे है। लेकिन बीजेपी और मोदी सरकार तो आज भी 2014 की जीत के जश्न में डूबी हुई है। उनको इस बात का ध्यान रखना चाहिये कि उस समय विपक्ष बिखरा हुआ था लेकिन आज विपक्ष एकजुट होकर बीजेपी को कड़ी टक्कर देते दिखाई पड़ रहे हैं। भाजपाइयों के केन्द्रीय नेतृत्व ने यह साफ निर्देश दिया है कि वो जनता को मोदी सरकार की नीतियों और योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दें।

स्वास्थ्य योजना आयूषमान भारत का मोदी ने स्वतंत्रता पर देश को लोकार्पित किया है। लेकिन आमजनता को आज तक यह नहीं पता है कि इस योजना के लिये कौन लोग पात्र हैं। इसके दायरे में किस तबके और वर्ग के लोगों शामिल किया जायेगा। पीएम मोदी सभी जगह अपने भाषणों में उज्ज्वला योजना का जिक्र जरूर करते हैं। 130 करोड़ की आबादी वाले देश में कुछ करोड़ लोगों को मुफ्त कनैक्शन देने से क्या देश के अन्य गरीब घरों में रसोई गैस पहुंच गयी। मोदी सरकार के आने पहले रसोई साढ़े तीन सौ रुपये की थी आज वो 800 से अधिक की हो गयी है। केन्द्र हर जगह अपने बयानों में गैस की कालाबाजारी पर रोक लगाने की बात करता है। अगर उनकी बातों में जरा भी सच्चाई होती तो खुलेआम गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी न हो रही होती। छोटे गैस के सिलंेडरों को बड़े सिलंेडरों से ही भरा जाता है। पूरे देश में इस प्रकार का कारोबार होता रहा है और आज भी हो रहा है। इस पर कोई भी सरकार पाबंदी नहीं लगा सकती है। सरकारें सिर्फ भाषण ही देती हैं। पिछली सरकारों को बदहाली के लिये कोसती हैं।

मोदी सरकार सिर्फ मार्केटिंग पर विश्वास करती है जिसमें वो मास्टर है। कांग्रेस को बीजेपी से सीखने की जरूरत है। वर्तमान बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की एक बात की तारीफ की जानी चाहिये कि उनके नेतृत्व में भाजपा दुनिया का सबसे ज्यादा सदस्य वाला राजनीतिक दल बना है। मोदी शाह की जोड़ी ने डेढ दर्जन से अधिक प्रदेशों में बीजेपी की सरकारें बनवायी हैं। लेकिन यह एक यक्ष प्रश्न है कि क्या 2019 में मोदी शाह की जोड़ी 2014 की ऐतिहासिक जीत को दोहरा पायेंगे या नहीं यह बात समय के गर्भ में है।

विनय गोयल

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